Saturday, 27 November, 2010

मनुष्य के बारे में सोचते हुए


इतिहास यह भी नहीं जनता कि आदिम मनुष्य धरती कब और कैसे पैदा हुआ |मनुष्य वस्तुतः वानर का सर्वोत्तम
विकसित रूप है |वानर का इतना परिष्कार हुआ कि वह अपनी कोटि से बहार निकल कर दूसरी कोटि में चला गया |
यद्यपि मूल ढांचा वाही है पर शरीर की बाहरी रुपरेखा और मस्तिष्क की रचना में क्रन्तिकारी परिवर्तन हुआ |
मनुष्य की विशेषताएं इतनी अधिक और महत्वपूर्ण है कि मनुष्य बनाने कि कल्पना पर आश्चर्य होता है |अनुमान है
कि मनुष्य कि उत्पत्ति अफ्रीका में हुई ||मेकिंस इसकी उतपत्ति युगांडा और केन्या को निर्धारित किया है, क्यों कि अज भी वहा बगैर पूंछ के वानर मिलते है |सवा करोड़ वर्ष पूर्व अफ्रीका और भारत परस्पर मिलेहुये थे क्यों कि उस
समय लाल सागर नहीं था |अतः अफ्रीका से एशिया और वहा से यूरोपे जाना आसान था |दक्षिण भारत के द्रविनो कि रुपरेखा दक्षिण अफ्रीका के हेमेटिक लोगो से मिलती जुलती है |अफ्रीका में पैदा हुआ आदिम मनुष्य पूरी दुनिया में छा गया और इस घटना में हजारो साल लगे|

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