Tuesday 17 September 2013

                                                 फाके  मस्ती के  वे दिन
                                                                                         भगवान स्वरूप कटिया र 
  विजय राय एक ऐसा नाम है जो ¨ हमारी वैचारिक मित्रों  की सूची में आज से लगभग 20-25 साल पूर्व दर्ज हुआ था और तबसे हमारी जो¨ड़ी एक दूसरे का  नाम का पर्याय बन गयी । सूचना विभाग में हमारी मैत्रिक जोड़ी इस स्तर तक पापुलर थी की विजय राय की जानकारियो   का स्रो¨त मुझे औ र मुझसे सम्बन्धित हर जानकारी का स्रो¨त विजय राय क¨ माना जाता था अ©र बाद में इसका विस्तार विभाग के  बाहर तक हुआ जो ¨ आज तक कायम है । आज जब किसी से बहुत दिन¨ं में मुलाकात ह¨ती है त¨ वह मेरे बारे में बात करते करते विजय राय क¢ बारे में बात करना नहीं भूलता अ©र आखीर में पूंछता है हां,राय साहब कैसे हैं? आप क¨ त¨ पता ह¨गा ही अ©र मैं भी उसे पूरे भर¨से से आष्वस्त करता कि बिल्कुल ठीक हैं अ©र हम लगातार एक दूसरे क¢ सम्पर्क में भी हैं ़यह बाकया मेरे अजीज मित्र अनिल सिन्हा अ©र अजय सिंह क¢ साथ अक्सर ह¨ता था अ©र वीरेन्द्र यादव जी भी क¢ साथ भी ़अ©र भी तमाम नाम है ज¨ हम द¨न¨ं क¨ द¨ अभिन्न मित्र¨ं की जुगुल ज¨ड़ी क¢ रूप में देखते रहे हैं अ©र यह हम द¨न¨ं क¢ लिए भी खुषी अ©र फक्र की बात है ़यह क¨ई परिकल्पना मात्र नहीं बल्कि एक यथार्थपरक सच्चाई है अ©र उसक¢ पीछे है हम द¨न¨ं का सामूहिक संघर्श का एक लम्बा सफर भी है ज¨ हम द¨न¨ं ने मिल कर एक जुनूनी हद तक किया जिसकी यादें बेहद र¨मांचकारी हैं ़इसक¢ अतिरिक्त हमारी द¨स्ती का आधार रहा हमारे व्यक्तित्व¨ं की पारदर्षिता,वैचारिक साम्यता,साहित्यिक-संास्कृतिक समझ अ©र रुचियां एवं गहन संवेदनषीलता ़हम द¨न¨ं क¢ लेखन क¢ क्षेत्र भले ही विविध् रहे ह¨ं पर मूलतः हम द¨न¨ं कवि हैं अ©र कविता हम द¨न¨ं का खास षगल रहा है अ©र षायद हमारी इस साहित्यिक प्रवृत्ति ने भी हम द¨न¨ं की मैत्री क¨ प्रगाढ़ किया ़एक सबसे महत्वपूर्ण बात हम ल¨ग¨ं क¢ बीच यह रही कि कभी वैचारिक टकराव नहीं हुआ पर इसका मतलब नहीं है कि हममें असहमतियां नहीं रहीं, हमेषा रहीं अ©र आज भी ह¨ सकती हैं पर खास बात यह है हम एक दूसरे क¨ अपने सार्थक अ©र रचनात्मक स¨च क¢ तकर्¨ं से कनविंस कर लेते थे ़हमारे पारस्परिक विष्वास अ©र भर¨स¨ं का स्तर यह ह¨गया था कि कुछ विशय¨ं पर मेरा मत है त¨ गलत नहीं ह¨गा सही ही ह¨गा अ©र यही मत राय साहब क¢ बारे में मेरा था ़हम द¨न¨ं का रसायनषास्त्र आपस में इतना इतना घुलामिला था कि भाव संक¢त ही अभिव्यक्ति क¢ लिए काफी ह¨ते थे ़विचार,राजनीति अ©र सामाजिक विशय हमारे पाले में रहते अ©र राय साहब मुझे इसका विषेशज्ञ मानते थे जबकि ऐसा कुछ था नहीं उसी तरह मैं भी राय साहब क¨ साहित्य, कला अ©र संकृति का मर्मज्ञ मानता था अ©र उनकी पकड़ भी इन विशय¨ं हमेषा अच्छी रही है ़पर हम एक दूसरे क¢ क्षेत्र में बाकायदे हस्तक्षेप करते थे ़सबसे महत्वपूर्ण बात थी एक दूसरे क¢ विचार¨ं क¢ प्रति गहरा सम्मान जिससे हम हम ब©ध्दिक प्रतिद्वन्दी क¢ बजाय हमेषा ब©ध्दिक मित्र बने रहे ़ हमारी मैत्री की जन्मस्थली प्रषासनिक सेवा प्रषिक्षण एक¢डमी नैनीताल है जहां हम द¨न¨ं ने वर्श 1988-89 में द¨ हफ्ते का प्रषिक्षण ग्रहण किया अ©र वहां साथ-साथ एक कमरे में रहे ़वैचारिक अ©र व्यावहारिक विमर्ष का एक अन¨खा अवसर था जहां हम एक दूसरे क¢ सामने खुले अ©र एक दूसरे क¨ हर दृश्टि से जान अ©र समझ सक¢ साथ ही जीवन क¢ तमाम पक्ष¨ं अ©र आयाम¨ं क¨ भी जान अ©र समझ सक¢ ़यहीं से हमारी स्थायी मैत्री की बुनियाद पड़ती है ज¨ धीरे-धीरे एक खुबसूरत घर©ंदे की षक्ल लेलेती हैं जिसकी ठंडी छांव में हमने वेफिक्री अ©र फाॅक¢ मस्ती क¢ वे दिन बितायें जिनकी याद करक¢ आज भी किसी की रूह कांप जायेगी अ©र र¨ंगटे खड़े ह¨ं जायेंगे ़पर हमारे लिए वे यादें आज भी उतनी ही र¨मांचकारी अ©र गर्व से भर देने वाली हैं ़राय साहब क¢ व्यक्तित्व उस हर व्यक्ति क¢ लिए एक रहस्य है जिसक¢ सामने वे खुले नहीं है ़उनकी स©म्यता अ©र विनम्रता बेषक उनक¢ व्यक्तित्व में चार चांद लगा देती है अ©र कम ब¨लना अ©र सटीक ब¨लना भी उनकी खासियत है ़हमेषा थ¨ड़ा रिजर्व सा रहते हैं इसलिए हर किसी क¢ साथ उनका समाय¨जन सम्भव नहीं ह¨ पाता ़यही परेषानी उन्हें उस समय नैनीताल प्रषिक्षण में जाने में आरही थी ़विभाग से लगभग 15 अधिकारी उस प्रषिक्षण में गये थे पर राय साहब जाने में कतरा रहे थे कि वहां किसक¢ साथ रहेंगे ़हमारे विभाग क¢ एक साथी उपाध्याय जी ने राय साहब क¨ समझाया कि कटियार साहब जारहें, आप इनक¢ साथ रहिये आपक¨ बेहद अच्छा लगेगा ़उपाध्याय जी हमारे साथ ही प्रकाषनब्यूर¨ं सह-सम्पादक क¢ रूप में कार्यरत थे अ©र उन्ह¨ंने षायद मुझे किसी हद तक समझ लिया ह¨गा षायद तभी वे मेरे बारे में राय साहब क¨ इतना आष्वस्त कर सक¢ ़तब तक मैं अ©र राय साहब महज विभागीय अधिकारी थे अ©र अ©पचारिक मुलाकात भी थी पर वह घनिश्ठता नहीं थे जिसे हम द¨स्ती की संज्ञा दे सक¢ं ज¨ आज है ़नैनीताल में हम द¨न¨ं ने एक दूसरे क¢ साथ रह कर न सिर्फ एन्ज्वाय किया बल्कि द¨स्ती की ताकत क¢ बल पर तमाम सृजनात्मक अ©र रचनात्मक सपने भी देख डाले जिनक¨ साकार करने हम द¨न¨ं ने अपनी आहुति दी अ©र संघर्श का अविस्मरणीय इतिहास रचा ़उस प्रषिक्षण दल क¢ कई साथी हमारे साथ आज नहीं हैं पर उस गु्रप फ¨ट¨ं में हम द¨न¨ं इतना युवा दिखते हैं कि लगता है की काष जिन्दगी वह बैकप हमारे पास ह¨ता त¨ उसे दुबारा जी सकते जिसे सिर्फ याद कर र¨मांचित ह¨ सकते हैं ़ कई बार स¨चता हूं कि हम द¨न¨ं एक कहानी क¢ एक ऐसे जीवन्त पात्र हैं जिसक¢ बड़े व्यापक आयाम हैं ़उसमें जीवन का हर पक्ष इतना साफ दिखता जितना ठहरे हुए पानी में किसी सुन्दरी का चेहरा या भ¨र की लालिमा का सुनहरा प्रतिबिम्ब ़पर सवाल है कि यह कहानी लिखे क©न ?हम द¨न¨ं विभाग में बुनियादी बदलाव का प्रतीक बन गये थे ़हर गलत चीज हम द¨न¨ं क¨ खलती त¨ उसक¢ लिए विचलित ह¨ जाते थे कि ऐसा क्य¨ं ह¨ रहा है ?जबकि विभाग क¢ अधिकांष ल¨ग यथास्थितिवाद क¨ अपनाते हुए रूढ्वादी ढंग चल रहे थे क्य¨ंकि बदलाव की जंग क¢ ज¨खिम उठाना हर किसी क¢ बस की बात नहीं है अ©र बदलाव चाहता भी क©न है ? हर क¨ई इस भ्रश्ट व्यवस्था में अपना हिस्सा अ©र अपनी जगह चाहता है ़इस बदलाव की जंग क¢ ज¨खिम से हम खुद भी वकिफ नहीं थे कि व्यवस्था अव्यव्स्था क¢ खिलाफ लड़ने वाल¨ं पर किस तरह वार करती है ़ यह त¨ जब भ¨गा तब पता चला ़सबसे मजेदार बात यह है कि बदलाव की इस मुहिम क¨ विभाग की युवा पीढ़ी बड़ी उम्मीद से हमारी अ¨र देख रही थी अ©र उच्च स्तर की न©करषाही क¢ लिए यही सबसे अधिक चिन्ता का विशय था ़कई हमारे बुजुर्ग कलीग स¨चते कि कटियार अ©र विजय राय विभाग में क्य¨ं क्रान्ति करना चाहते हैं अ©र क्य¨ं किसी क¢ फटे में टांग अड़ाते हैं ?़ज¨ क¨ई ज¨ कुछ कर रहा है गलत सही उसे करने दें अ©र अपनी सेटिंग करक¢ अपना लाभ देखें ़ऐसे त¨ यह दूसर¨ं का त¨ नुक्सान कर ही रहे हैं अपना भी नुक्सान करेंगे ़पहुंच वाले ल¨ग इन्हें जहुन्नुम में पहुंचा देंगे ़नयी नयी न©करी है ,कमीषन सीधे आये इसलिए न©करी क¢ दांवपेंच नहीं जानते अ©र यहां ल¨ग चप्पड़ रगड़ कर बाबू अ©र चपरासी से अधिकारी बने है जिसक¢ लिए उन्हें अपने घर की अस्मिता तक दांव पर लगायी है त¨ पैसा नहीं कमायेंगे भला ? अन्ततः हमने इस स¨च क¨ त¨ड़ा अ©र बदलाव अ©र प्रतिर¨ध की एक नयी परम्परा की षुरुआत हुई अ©र हर क¨ई अपने अधिकार¨ं क¢ लिए लड़ने लगा अ©र ल¨ग¨ं क¨ न्याय मिलने लगे ़पर इसक¢ लिए हमें विधान सभा से लेकर न्यायालय¨ं तक सच्चाई पहुंचानी पड़ी ़एक समय ऐसा भी था जब विधान सभा अ©र उच्च न्यायालय में सूचना विभाग का भ्रश्टाचार एक साथ बेनकाब ह¨ता था अ©र उसकी चीख मीडिया क¢ जरिये सर्वत्र गूंजती थी अ©र सुनते सुनते व्यवस्था क¢ कान पकने लगते थे ़अ©र अन्त में बदलाव आया अ©र गलत ल¨ग¨ं क¨ सजाएं तक हुईं पर इस सबक¢ लिए हम द¨न¨ं क¨ क्या क्या झेलना पड़ा ,किन किन यातनाअ¨ं से गुजरना पड़ा वह स्वयं में एक पूरे उपन्यास का विशय है ़पर इस पूरी जंग में हमारे परिवार हमारे साथ जिस मुस्तैदी से खड़े रहे उसक¢ लिए हमें अपने परिवार¨ं अ©र उन साथिय¨ं पर गर्व है ज¨ लड़ाई हमारे साथ रहे अ©र विचलित नहीं हुए ़अ©र सच यह है कि हम अपनी वैचारिक ताकत अ©र न्याय की भूख क¢ कारण ही हम यह जंग लड़ सक¢ ़इस जंग क¢ नुक्सान फायदे अपनी जगह हैं पर जिन अनुभव¨ं से हम गुजरे अ©र उसे महसूस कर ज¨ हासिल किया वह त¨ हम षायद हजार¨ं पुसक¨ं क¨ पढ़ कर भी हासिल नहीं कर सकते थे ़इस संस्मरण का उल्लेख कर मैं त¨ र¨मांचित ह¨ ही रहा हूं षायद राय साहब भी र¨मांचित हुए बिना नहीं रहेंगे ़