Friday, 23 September, 2011

डर के आगे जीत


जीवन का आधार तीन बातों पर टिका है| विकास के लिए भोजन , अस्तित्व के बचाव के लिए सुरक्षा और वंश बढ़ाने के लिए यौन सम्बन्ध |यह जीवन की मुलभूत सिध्दान्त्की है |असुरक्षा ही डर को जन्म देती है| इन्सान उन सभी से डरता है जो उसे नुकसान पहुंचा सकते हें |म्रत्यु भी डर का बहुत बड़ा कारण है | म्रत्यु अर्थात अपने अस्तित्व खो जाने का डर ह़र किसी को सताता है |म्रत्यु जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है ,उससे डर कैसा ?म्रत्यु के बाद क्या होगा यह बताने के लिए आज तक कोई लौट कर नहीं आया |जीवन जलती हुई मोमबत्ती के लौ के सामान है |जब मोमबत्ती के उर्जा का क्रम टूट जाता है तब लौ समाप्त हो जाती है |इसी तरह जब हमारी खरबों कोशिकाएं कमजोर हो जाती हें तब हम बूढ़े हो जाते हें और जब सभी कोशिकाएं पूरी तरह काम करना बंद कर देती हें तब हम मर जाते हें |यह जीवन की सच्चाई है |इसे जानते ही धर्म का महल ताश के पत्ते की तरह ढह जाता है |हमारा सांप बिच्छू ,शेर , भेडिये से डरना तो समझ में आता है पर हम भागवान से क्यों डरते हैं ?दरसल हमारे इसी डर में उनकी जीत छिपी है जो इंसानियत को डरते हैं | हमें इस डर को भगाना है और इसी डर के आगे इंसानियत की जीत है |

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