Sunday, 5 December, 2010

जिंदगी क़ी दौड़ का वह दिन


एक दिसंबर २०१० का मेरी जिंदगी एक यादगार लम्हा बन गया|विश्व एड्स दिवस के अवसर पर आयोजित
५कि.मी.क़ी मैराथन दौड़ जितना मेरे लिए एक रोमांचक घटना के साथ-साथ ख़ुशी का विषय भी था |डा .एस.के .
सक्सेना जो इस दौड़ में भागीदार भी थे क़ी प्रेरणा और उत्साहवर्धन यह संभव हो सका |मेरे मित्र और परिवारजन
बेहद खुश हैं और मैं भी |ऐसी उपलब्धियां जिंदगी को ताकत और उम्मीद देती हैं |

1 comment:

  1. दौडना कभी भी शुरू कर सकते हैं और सेहत के लिये ये बहुत मुफ़ीद है। दौड समाप्त होने के बाद मिलने वाली खुशी को वही समझ सकता है जिसने खुद दौड में भाग लिया हो । मेरा दौडने वाला ब्लाग आप यहां देख सकते हैं।
    http://runwithbcrr.blogspot.com

    ReplyDelete