Monday 10 January 2011

हम फौलाद के गीत गायें गे


हम फौलाद के गीत गायें गे
दुनिया फौलाद की बनी है
और हम फौलाद की संताने हैं |

हम प्यार का नया संसार रचें गे
जहाँ भेदभाव की नफ़रत के लिए
कोई जगह नहीं होगी
पर द्वंद्व होगा जो हमें आगे बढ़ने का
हौसला दे गा |

जैसे लोग निहाई पर
लोहे का पत्तर ढालातें हैं
वैसे ही हम
नए दिन ढालें गे
उसमें उल्लास हीरे की तरह जड़ा होगा |

पसीने से नहाये हम पाताल में उतरे गे
और धरती के गर्भ से
हम नया वैभव जीत लायें गे
हम पर्वत के शिखर पर चढ़ कर
सूरज के टुकडे बन जाएँ गे |

इंसानियत से सराबोर
हम एक शानदार जिंदगी ढालें गे
ऊषा की लाली से हम
अपनी मांसपेसियों में लाल रंग भरें गे |

हम अनेक है पर
एक में संगठित हो गे
फौलाद के उस गीत में
हम सब की आवाज होगी
हम फौलाद के बने है
इसलिए
फौलाद के गीत गए गे |

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