Thursday 3 March 2011

एक बेचैन आवाज




भागवान स्वरूप कटियार
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जहां मेरा इंतजार हो रहा है
वहां मैं पहुंच नहीं पा रहा हूं
दोस्तों की फैली हुई बाहें
और बढे हुए हांथ मेरा इंतजार कर रहे हैं |

पर मेरी उम्र का पल पल
रेत की तरह गिर रहा है
रैहान मुझे बुला रहा है
ऋतु -अनुराग ,निधि -अरशद
शाश्वत -दिव्या और मेरी प्रिय आशा
और मेरे दोस्तों की इतनी बडी दुनिया
मैं किस किस के नाम लूं
सब मेरा इंतजार कर रहे हैं
पर मैं पहुंच नहीं पा रहा हू
मेरी सांसें जबाब दे रही हैं |

पर दोस्तो याद रखना
मौत , वक़्त की अदालत का
आखिरी फैसला नहीं है
जिंदगी मौत से कभी नहीं हारती
मेरे दोस्त ही तो मेरी ताकत रहे हैं
मैं हमेशा कहता रहा हूँ
कि दोस्ती से
बडा कोई रिश्ता नहीं होता
और ना ही होता है
दोस्ती से बडा कोई धर्म
मैं तो यहाँ तक् कहता हूं
कि दोस्ती से बडी कोई विचारधारा भी नहीं
जैसे चूल्हे में जलती आग से बडी
कोई रोशनी नहीं होती |

मेरी गुजारिश है
कि उलझे हुए सवालों से टकराते हुए
एक बेहतर इंसानी दुनिया बनाने के लिए
मेरी यादों के साथ
संघर्ष का यह कारवां चलता रहे
मंजिल के आखिरी पडाव तक |

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