Tuesday, 28 May, 2013

रामस्वरूप वर्मा समग्र की भूमिका

                 
प्रखर एवं प्रतिबध्द समाजवादी रामस्वरूप वर्मा आजादी  बाद भारतीय राजनीति में सक्रिय उस पीढ़ी क¢ राजनेता थे जिन्ह¨ंने विचारधारा अ©र व्यापक जनहित¨ं की राजनीति क¢ लिए अपना सर्वस्य अर्पित कर दिया ़बेषक वे अपने समय की राजनीति क¢ एक फिनाॅमिना (परिघटना)थे ़लगभग पचास साल तक राजनीति में सक्रिय रहे रामस्वरूप वर्मा क¨ राजनीति का कबीर कहा जाता है ़डाॅ॰ राममन¨हर लo¨हिया क¢ निकट सहय¨गी अ©र उनक¢ वैचारिक मित्र तथा १९६७ में उत्तर प्रदेष सरकार क¢ चर्चित वित्तमंत्री रामस्वरूप वर्मा जिन्ह¨ंने उस समय २॰ कर¨ड़ लाभ का बजट पेष कर पूरे आर्थिक जगत क¨ अचम्भित कर दिया ़उनका सार्वजनिक जीवन सदैव निश्कलंक,निडर,निश्पक्ष अ©र व्यापक जनहित¨ं क¨ समर्पित रहा ़राजनीति में ज¨ मर्यादाएं अ©र मानदंण्ड उन्ह¨ंने स्थापित किये अ©र जिन्हें उन्ह¨ंने स्वयं भी जिया उनक¢ लिए वे सदैव आदरणीय अ©र स्मरणीय रहेंगे ़बेषक उत्तर प्रदेष विधान सभा क¢ इतिहास में रामस्वरूप वर्मा मूल्य¨ं,सिध्दान्त¨ं,जनसर¨कार¨ं की राजनीति की एक मिसाल क¢ रूप में सदैव प्रेरणास्र¨त रहेंगे ़
         २२अगस्त १९२३ क¨ कानपुर्(वर्तमान कानपुर देहात) क¢ ग्राम ग©रीकरन क¢ एक किसान परिवार में जन्में रामस्वरूप ने राजनीति क¨ अपने  कर्मक्षेत्र क¢ रूप में छात्र जीवन में ही चुन लिया था बावजूद इसक¢ कि छात्र राजनीति में  उन्ह¨ंने कभी हिस्सा नहीं लिया ़उनकी प्रारम्भिक षिक्षा कालपी अ©र पुखरायां में हुई जहां से उन्ह¨ंने हाई स्कूल अ©र इंटर की परीक्षाएं उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण की ़वर्मा जी सदैव मेधावी छात्र रहे अ©र स्वभाव से अत्यन्त स©म्य,विनम्र,मिलनसार पर आत्मस्म्मान अ©र स्वभिमान उनक¢ व्यक्तित्व में कूट-कूट कर भरा हुआ था उन्ह¨ंने १९४९ में इलाहाबाद विष्वविद्यालय हिन्दी में एम॰ए॰ अ©र इसक¢ बाद कानून की डिग्री हासिल की ़उन्ह¨ंने भारतीय प्रषासनिक सेवा की परीक्षा भी उत्तीर्ण की अ©र इतिहास में सवर्¨च्च अंक पाये जबकि पढ़ाई में इतिहास उनका विशय नहीं रहा ़पर न©करी न करने दृढ़ निष्चय क¢ कारण साक्षात्कार में षामिल नहीं हुए ़इनक¢ पिता का नाम वंषग¨पाल था ़वर्मा  जी अपने चार भाइय¨ं में सबसे छ¨टे थे ़अन्य तीन भाई गांव में खेती किसानी करते थे पर उनक¢ सभी बड़े भाइय¨ं ने वर्मा जी की पढ़ाई लिखाई पर न सिर्फ विषेश ध्यान दिया बल्कि अपनी रुचि क¢ अनुसार कर्मक्षेत्र चुनने क¢ लिए भी प्र¨त्साहित किया ़पढ़ाई क¢ बाद सीधे राजनीति में आने पर परिवार ने कभी आपत्ति नहीं की बल्कि हर सम्भव उन्हें प्र¨त्साहन अ©र सहय¨ग दिया ़सर्वप्रथम वे १९५७ में स¨षलिस्ट पार्टी से भ¨गनीपुर विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेष विधान सभा क¢ सद्स्य चुने गये,उस समय उनकी उम्र मात्र ३४ वर्श की थी ़१९६७ में संयुक्त स¨षलिस्ट पर्टी से,१९६९ में निर्दलीय,१९८॰,१९८९ में ष¨शित समाजदल से उत्तर प्रदेष विधान सभा क¢ सदस्य चुने गये ़१९९१ में छठी बार ष¨शित समाजदल से विधान सभा क¢ सदस्य निर्वाचित हुए ़जनान्द¨लन¨ं में भाग लेते हुए वर्मा जी १९५५,१९५७,१९५८,१९६॰,१९६४,१९६९,अ©र १९७६ में १८८ आई॰पी॰सी॰की धारा ३ स्पेषल एक्ट धारा १४४ डी॰ आई॰ आर॰ आदि क¢ अन्तर्गत जिला जेल कानपुर,बांदा,उन्नाव,लखनऊ तथा तिहाड़ जेल दिल्ली  में राजनैतिक बन्दी क¢ रुप में सजाएं भ¨गीं ़वर्मा जी ने १९६७-६८ में उत्तर प्रदेष की संविद सरकार में वित्तमंत्री क¢ रूप में २॰ कर¨ड़ क¢ लाभ का बजट पेष कर पूरे आर्थिक जगत क¨ अचम्भे में डाल दिया ़बेषक संविद सरकार की यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी ़कहा जाता है कि एक बार सरकार घाटे में आने क¢ बाद फायदे में नहीं लाया जा सकता है,अधिक से अधिक राजक¨शीय् घाटा कम किया जा सकता है ़दुनिया क¢ आर्थिक इतिहास में यह एक अजूबी घटना थी जिसक¢ लिए विष्व मीडीया ने वर्मा जी से साक्षात्कार कर इसका रहस्य जानना चाहा ़संक्षिप्त जबाब में त¨ उन्ह¨ंने यही कहा कि किसान से अच्छा अर्थषास्त्री अ©र कुषल प्रषासक क¨ई नहीं ह¨ सकता क्य¨ंकि लाभ-हानि क¢ नाम पर ल¨ग अपना व्यवसाय बदलते रहते हैं पर किसान सूखा-बाढ़ झेलते हुए भी किसानी करना नहीं छ¨ड।ता ़वर्मा जी भले ही डिग्रीधारी अर्थषास्त्री नहीं थे पर किसान क¢ बेटे ह¨ने का ग©रव उन्हें प्राप्त था ़बाबजूद इसक¢ कि वर्मा जी ने कृशि,सिंचाई,षिक्षा,चिकित्सा,सार्वजनिक निर्माण जैसे तमाम महत्वपूर्ण विभाग¨ं क¨ गत वर्श से डेढ़ गुना अधिक बजट आवंटित किया तथा कर्मचारिय¨ं क¢ मंहगाई भत्ते में वृध्दि करते हुए फायदे का बजट पेष किया ़
       अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी करते करते वर्मा जी समाजवादी विचारधारा क¢ प्रभाव में आगये थे अ©र डा0ॅल¨हिया क¢ नेतृत्व में संयुक्त स¨षलिस्ट पार्टी में षामिल ह¨गये ़डाॅ॰ राममन¨हर ल¨हिया क¨ अपनी पार्टी क¢ लिए एक युवा विचारषील नेतृत्व मिल गया जिसकी तलाष उन्हें थी ़डा॰ ल¨हिया क¨ वर्मा जी क¢ व्यक्तित्व की सबसे महत्वपूर्ण बात यह लगी कि उनक¢ पास एक विचारषील मन है,वे संवेदनषील हैं,उनक¢ विचार¨ं में म©लिकता है,इन सबसे बड़ी बात यह थी किसान परिवार का यह न©जवान प्र¨फ¢सरी अ©र प्रषासनिक रुतबे की न©करी से मुंह म¨ड़ कर राजनीति क¨ सामाजिक कर्म क¢ रूप में स्वीकार कर रहा है ़डाॅ0ल¨हिया क¨ वर्मा जी का जिन्दगी क¢ प्रति एक फकीराना नजरिया अ©र निस्वार्थी-ईमानदार तथा विचारषील व्यक्तित्व बहुत भाया अ©र उनक¢ सबसे विष्वसनीय वैचारिक मित्र बन गये क्य¨ंकि वर्मा जी भी डा॰ ल¨हिया की तरह देष अ©र समाज क¢ लिए कबीर की तरह अपना घर फूंकने वाले राजनैतिक कबीर थे ़वर्मा जी अपने छात्र जीवन में आजादी की लड़ाई क¢ चष्मदीद गवाह रहे पर उसमें हिस्सेदारी न कर पाने का मलाल उनक¢ मन में था इसीलिए भारतीय प्रषासनिक सेवा की रुतबेदार न©करी क¨ लात मार कर राजनीति क¨ देष सेवा का माध्यम चुना अ©र राजनीति भी सिध्दान्त¨ं अ©र मूल्य¨ं की ़उन्ह¨ंने उत्तर प्रदेष विधान सभा क¢ लिए पहला चुनाव १९५२ में भ¨गनीपुर चुनाव क्षेत्र से एक वरिश्ठ कांगे्रसी नेता रामस्वरूप गुप्ता क¢ विरुध्द लड़ा अ©र महज चार हजार मत¨ं से वे हारे पर १९५७ क¢ चुनाव में उन्ह¨ंने रामस्वरूप गुप्ता क¨ पराजित किया ़उनक¢ प्रतिद्वन्दी रामस्वरूप गुप्ता ज¨ उम्र में उनक¢ पिता तुल्य थे अ©र धनाढ्य कंागे्रस क¢ वरिश्ठ नेता थे ़गुप्ता जी ने वर्मा जी से कहा कि रामस्वरूप अभी तुम न©जवान ह¨ अ©र गरीब किसान परिवार से ह¨, राजनीति में बहुत पैसा खर्च ह¨ता है अ©र तमाम दांव-पेंच अजमाये जाते हैं ़तुम्हारे जैसे भले अ©र गरीब ल¨ग¨ं क¢ लिए यह राजनीति का कर्म उपयुक्त नहीं है ़चाह¨ त¨ प्र¨फ¢सरी बगैरह तुम्हे मिल सकती है अ©र इसमें मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं ़पर वर्मा  जी नहीं डिगे अ©र आगामी १९५७ में रामस्वरूप गुप्ता क¨ हरा कर विधान सभा पहुंचे अ©र यह सिध्द कर दिया कि राजनीति सिर्फ धनवान¨ं का खेल नहीं है बल्कि किसान¨ं अ©र मजदूर¨ं क¢ बेटे भी वहां पहुंच कर अपने वर्ग क¢ हित¨ं क¨ प्रभावषाली ढंग से रख सकते हैं ़
     उन्हें राजनीति में स्वार्थगत समझ©ते अ¨हद¨ं की द©ड़ से सख्त नफरत थी ़उनका ध्येय एक ऐसे समाज की संरचना करना था जिसमें हरक¨ई पूरी मानवीय गरिमा क¢ साथ जीवन जी सक¢ ़वे सामाजिक आर्थिक,सामाजिक राजनैतिक न्याय क¢ साथ साथ सामाजिक,आर्थिक,राजनैतिक अ©र सांस्कृतिक बराबरी क¢ प्रबल य¨ध्दा थे अ©र इसक¢ लिए वे चतुर्दिक क्रान्ति अर्थात सामाजिक,आर्थिक,राजनैतिक अ©र सांस्कृतिक क्रान्ति की लड़ाई एक साथ लड़े जाने पर ज¨र देते थे ़वर्मा जी ने १९६९ में अर्जक संघ का गठन किया अ©र अर्जक साप्ताहिक का सम्पादन अ©र प्रकाषन प्रारंभ किया ़अर्जक संघ अपने समय का सामाजिक क्रान्ति का एक ऐसा मंच था जिसने अंधविष्वास पर न सिर्फ हमला किया बल्कि उत्तर भारत में महाराश्ट्र अ©र दक्षिण भारत की तरह सामाजिक न्याय क¢ आन्द¨लन का बिगुल फूंका ़उन्हें उत्तर भारत का अंम्बेडकर भी कहा गया ़मंगलदेव विषारद अ©र महाराज सिंह भारती जैसे तमाम समाजवादी वर्मा जी क¢ इस सामाजिक न्याय क¢ आन्द¨लन से जुड़े अ©र अर्जक साप्ताहिक में क्रान्तिकारी वैचारिक लेख प्रकाषित हुए ़उस समय क¢ अर्जक साप्ताहिक का संग्रह विचार¨ं का महत्वपूर्ण दस्तावेज है ़उत्तर प्रदेष में सामाजिक बदलाव की जिस जमीन पर मायावती अ©र मुलायम सिंह सत्ता की राजनीत कर रहे हैं अ©र अपनी अपनी सरकारें उसी ब्राह्मणवादी ढर्रे पर चला रहे हैं,इस सामाजिक अ©र राजनैतिक चेतना की पृश्ठभूमि वर्मा जी ने अर्जकसंघ क¢ आन्द¨लन क¢ जरिये तैयार की थी पर उन्हें दुख था सपा अ©र बसपा ने ब्राह्मणवाद अ©र कापर्¨रेट ताकत¨ं से गठज¨ड़ कर जनता क¨ ध¨खा दिया अ©र सामाजिक न्याय क¢ आन्द¨लन क¨ नुक्सान पहुंचया ़वी॰पी॰ सिंह ने भले ही सामाजिक न्याय क¢ लिए अपनी सरकार कुरबान की ह¨ पर मायावती अ©र मुलायम सिंह सत्ता क¢ लिए ब्राह्मणवाद से गठज¨ड़ ही करते रहे ़
                 वर्मा जी ने “क्रांन्ति क्य¨ं अ©र कैसे“,ब्राह्मणवाद की षव परीक्षा,अछूत समस्या अ©र समाधान,ब्राह्मणण महिमा क्य¨ं अ©र कैसे?मनुस्मृति राश्ट्र का कलंक,निरादर कैसे मिटे,अम्बेडकर साहित्य की जब्ती अ©र बहाली,भंडाफ¨ड़,मानववादी प्रष्न¨त्तरी। जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक¢ं लिखी ज¨ अर्जक प्रकाषन से प्रकाषित हुई़ं ़ महाराज सिंह भारती अ©र रामस्वरूप वर्मा की ज¨ड़ी “माक्र्स अ©र एंगेल “ जैसे वैचारिक मित्र¨ं की ज¨ड़ी थी अ©र द¨न¨ं का अन्दाज बेबाक अ©र फकीराना था ़द¨न¨ं किसान परिवार क¢ थे अ©र द¨न¨ं क¢ दिल¨ं में गरीबी ,अपमान अन्याय अ©र ष¨शण की गहरी पीड़ा थी ़महाराज सिंह भारती ने सांसद क¢ रूप में पूरे विष्व का भ्रमण कर दुनिया क¢ किसान¨ं अ©र उनकी जीवन पध्द्ति का गहन अध्ययन किया अ©र उन्ह¨ंने महत्वपूर्ण पुस्तक¢ं लिखी “़सृश्टि अ©र प्रलय“ उनकी पुस्तक डार्विन की “आॅरजिन आॅफ स्पसीज “ की टक्कर की सरल हिन्दी में लिखी गयी पुस्तक है ज¨ आम आदमी क¨ यह बताती है कि यह दुनिया कैसी बनी ? अ©र यह भी बताती है कि इसे ईष्वर ने नहीं बनाया है बल्कि यह स्वतः कुदरती नियम¨ं से बनी है अ©र इसक¢ विकास में मनुश्य क¢ श्रम की अहम भूमिका है ़उनकी “ ईष्वर की ख¨ज“ अ©र भारत का निय¨जित दिवाला जैसी अनेक विचार परक पुस्तक¢ं हैं ज¨ अर्जक प्रकाषन से प्रकाषित हुई हैं ़इन द¨न¨ं महापुरुश¨ं का साहित्य आज क¢ द©र में हमारी महत्वपूर्ण चेतना षक्ति ह¨ सकती है जब हम कापर्¨रेट पूंजी अ©र ब्राह्मणवाद क¢ षिकंजे में कसते जा रहे हैं ़
           बिहार क¢ लेनिन कहे जाने वाले जगदेव बाबू ने वर्मा जी क¢ विचार¨ं अ©र उनक¢ संघर्शषील व्यक्तित्व से प्रभावित ह¨कर ष¨शित समाज दल का गठन किया ़जगदेव बाबू क¢ राजनेतिक संघर्श से आंतकित ह¨कर उनक¢ राजनैतिक प्रतिद्वन्दिय¨ं ने उनकी हत्या करा दी ़जगदेव बाबू की षहादत से ष¨शित समाज दल क¨ गहरा आघात लगा पर सामाजिक क्रान्ति की आग अ©र तेज हुई ़जगदेव बाबू बिहार क¢ पिछड़े वर्ग क¢ किसान परिवार से थे अ©र वर्मा जी की तरह वे भी अपने संघर्श क¢ बूते बिहार सरकार मंत्री रहे ़वर्मा जी का संपूर्ण जीवन देष अ©र समाज क¨ समर्पित था ़उन्ह¨ंने “जिसमें समता की चाह नहीं/वह बढि़या इंसान नहीं ,समता बिना समाज नहीं /बिन समाज जनराज नहीं जैसे कालजयी नारे गढ़े ़राजनीति अ©र राजनेता क¢ बारे में एक साक्षात्कार में दिया गया उनका बयान ग©र तलब है ़राजनीति क¢ बारे में उनका मानना है कि यह षुध्दरूप से अत्यन्त संवेदनषील सामाजिक कर्म है अ©र एक अच्छे राजनेता क¢ लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि उसे देष अ©र स्थानीय समाज की समस्याअ¨ं की गहरी अ©र जमीनी समझ ह¨ अ©र उनक¢ हल करने की प्रतिबध्द्ता ह¨ ़जनता अपने नेता क¨ अपना आदर्ष मानता है इसलिए सादगी,ईमानदारी ,सिध्दान्तवादिता क¢ साथ-साथ कर्तब्यनिश्ठा निहायत जरूरी है ़वर्मा जी ने विधायक¨ं क¢ वेतन बढ़ाये जाने का विधान सभा में हमेषा विर¨ध किया अ©र स्वयं उसे कभी स्वीकार नहीं किया ़वर्मा जी ने संविद सरकार में सचिवालय से अंगे्रजी टाइप राइटर्स हटवा दिये अ©र पहली बार हिन्दी में बजट पेष किया ज¨ परंपरा अब बरकरार ़वर्मा जी ने बजट में खण्ड-६का समावेष किया जिसमें प्रदेष क¢ कर्मचारिय¨ं/अधिकारिय¨ं का लेखा ज¨खा ह¨ता है,इसक¢ पहले सरकारें कर्मचरिय¨ं क¢ बिना किसी लेखे -ज¨खे क¢ अपने कर्मचारिय¨ं क¨ वेतन देती थी ़वर्मा जी क¢ चिन्तन में समग्रता थी ़उन्ह¨ंने क्रन्ति क¨ परिभाशित करते हुए कहा कि क्रान्ति ,“जीवन क¢ पूर्व निर्धारित मूल्य¨ं का जनहित में पुनिर्धारण करना है क्रान्ति है “। उनक¢ विचार म©लिक ह¨ते हैं पर वे बाबा साहब डा॰ अम्बेडकर ,चारवाक,कार्ल माक्र्स अ©र ग©तम बुध्द क¢ विचार¨ं से प्रभावित थे पर कहीं कहीं इनसे असहमत भी थे ़यही बेबाकी उनकी खासियत थी ़आज उनक¢ विचार¨ं की हमें बेहद जरूरत है अ©र उनकी प्रासांगिकता पहले से कहीं अधिक है क्य¨ंकि पूरा देष एक दिषाहीन राजनीति क¢ पतन क¢ गहरे गढ्डे की अ¨र जा रहा है ़मुलायम सिंह का कापर्¨रेट पूॅजीवाद अ©र परिवारवाद अ©र मायावती का भ्रश्टाचारयुक्त ब्राह्मणवादी अम्बेडकरवाद की हताषा भरे इस द©र्  उनक¢ विचार हमारा बहुत बड़ा बल हैं ़राजनीत क¢ इस कबीर क¨ उनक¢ 90वें जन्म दिवस पर उनक¢ समग्र लेखन का प्रकाषन हमारे लिए एक सुखद उपलब्धि है ़        
    वर्मा जी का समग्र लेखन द¨ खण्ड¨ं में प्रकाषित ह¨ता देख मुझे बेहद प्रसन्नता ह¨ रही है ़इस विचारहीनता अ©र विकल्पहीनता क¢ द©र में इसकी बहुत आवष्यकता थी ़ष¨शित वर्ग की उसकी मुक्ति का सबसे बड़ा हथियार विचार ही है अ©र वर्मा जी का समग्र राजनैतिक-सामाजिक संघर्श अ©र लेखन इस ष¨शित वर्ग की मुक्ति क¨ समर्पित रहा है ़उनका समग्र लेखन अ©र उनकी तर्क अधारित वैचारिकी महज पुस्तकालय¨ं अ©र पुस्तकीय ज्ञान की उत्पत्ति नहीं है बल्कि यह सब उनक¢ राजनैतिक अ©र सामाजिक कर्म की प्रय¨गषाला में व्यवहार क ¢परीक्षण में तप कर ही निकले हैं ़वे हमेषा अपने विचार¨ं क¢ खिलाफ तर्कसंगत बहस क¢ लिए सदैव तैयार रहते थे ़“मानववादी प्रष्न¨त्तरी“ उनकी पुसतक इसकी एक मिसाल है जिसमें दुनिया भर क¢ ल¨ग¨ं से पूछे प्रष्न¨ं क¢ उनक¢ द्वारा दिये गये जबाब संकलित हैं ़वे चुनाव हारे या जीतें पर अपने सिध्दान्त¨ं पर हमेषा अडिग रहे ़राजनीति उनक¢ लिए सदैव  एक मिषन रहा जिसका लक्ष्य था हर तरह की गैर बराबरी क¨ समाप्त कर समतामूलक समाज की स्थापना करना है ़वर्मा जी ने बाबासाहब डाॅ0 अम्बेडकर क¢ सामाजिक क्रान्ति क¢ आन्द¨लन क¨ आगे बढ़ाया जिसे कांषीराम अ©र मायावती ने सत्ता की राजनीत का अ©जार का बना कर ब्राहमणबाद क¢ जाल में फंसा दिया जिसक¢ डाॅ0 अम्बेडकर सदैव लड़ते रहे ़यह महत्वकंाक्षी य¨जना कैसे मैं पूरी कर सका इसक¢ लिए मुझे स्वयं बेहद अचरज ह¨ रहा है ़क्य¨ंकि वर्मा जी क¢ निकट रहे राजनैतिक ल¨ग¨ं से जब भी इस कार्य क¢ बारे में कहा त¨ या त¨ उन्ह¨ंने उदासीनता दिखाई या फिर इसे बहुत महत्व नहीं दिया ़मैं ने वर्मा जी समग्र साहित्य न सिर्फ पढ़ा था बल्कि उनक¢ जीवन काल में ही उस पर गहन विवेचना भी की है़ ़वर्मा जी मेरे माक्र्सावादी नजरिये से भलीभाॅति वाकिफ थे इसलिए मेरे तर्क वे बड़े ध्यान से सुनते थे अ©र अपनी सहमति-असहमति भी देते थे ़मेरे कुछ लेख भी अर्जक साप्ताहिक में प्रकाषित हुए ़मैं उनकी यात्राअ¨ं में उनका सहयात्री भी रहा ़मुझे कहने में क¨ई संक¨च नहीं है कि वर्मा जी क¢ स्नेह अ©र सान्निध्य का मुझ पर गहरा प्रभाव है ़मैं ने जिन विचारक¨ं क¨ पढ़ा था जैसे माकर््स अ©र अम्बेडकर उनकी छाया मुझे वर्मा जी में दिखती थी ़वे अक्सर कहते थे कि भारतीय कम्युनिस्ट अपने क¨ डिकास्ट अ©र डिक्लास नहीं कर पाये अ©र भारतीय परिप्रेक्ष्य में माक्र्सवाद क¨ वैचारिक स्वरूप नहीं दे पाये जैसा ह¨ चीमिन्ह अ©र माअ¨ ने चीन अ©र कास्ट्र¨ ने क्यूबा में दिया ़ये सब रूस अ©र चीन की तरफ देखते रहे अ©र वक़्त वेक़्त सत्ताधारी दल¨ं क¢ पिछलग्गू ह¨ गये ़ वर्मा  जी  कार्ल  माकर््स क¢ द्वन्द्वात्मक भ©तिकवाद क¢ प्रबल समर्थक थे अ©र वह उनक¢ दार्षनिक चिन्तन का आधार भी रहा ़तभी वे ब्राहमणवाद पर इतना करारा प्रहार कर पाये ़वे ब्राह्मणवाद अ©र पूॅजीवाद क¨ सर्वहारा का बराबर का दुष्मन मानते थे बल्कि कई मायने में ब्राह्मणवाद क¨ ज्यादा खतरनाक मानते थे क्य¨ंकि अपने स्वार्थ क¢ लिए पूॅजी उदार ह¨ सकती है पर ब्राह्मणवाद दिमागी गुलामी से कभी मुक्त नहीं करता ़एक जगह वे माक्र्स क¨ क¨ट करते हुए लिखते हैं “चूंकि सर्वहारा वर्ग अपने प्रति निकृश्ट व्यवहार वर्दास्त करने क¨ तैयार नहीं है इसलिए उसका साहस, आत्मविष्वास,स्वाभिमान अ©र स्वाधीनता की भावना भ¨जन अ©र र¨टी से ज्यादा जरूरी है ़“ इसे उन्ह¨ंने तन की भूख र¨टी अ©र मन की भूख इज्जत क¢ रूप में परिभाशित किया ़
 मैं आभारी हूॅ अपने आदरणीय अग्रज सम्यक प्रकाषन क¢ प्र¨पराइटर षान्तिस्वरूप जी का जिन्ह¨ंने न सिर्फ रामस्वरूप वर्मा समग्र प्रकाषन में गहरी रुचि दिखाई बल्कि मेरा उत्साह बर्धन भी किया ़उनका कहना था कि वे त¨ इस काम क¨ करने क¢ लिए व्य्ाग्र ही थे पर उनक¢ पास सन्दर्भित सामग्री का अभाव था जिसे मैने पूरा किया ़इस काम में मेरी सबसे अधिक मदद की बड़े भाई दयानाथ निगम जी ने ़उन्ह¨ंने मेरे काम क¨ बेहद अहमियत दी अ©र पूरा सहय¨ग दिया ़वे भी वर्मा जी क¢ निकट ल¨ग¨ं में रहे है ़वे प्रूफ रीडिंग से लेकर दिल्ली की भागद©ड़ में अपनी अस्वथता क¢ बावजूद मेरे कदम से कदम मिला कर मेरे साथ चले ़उन्हें भी इसक¢ प्रकाषन से उतनी ही खुषी जितनी मुझे है ़उन्ह¨ंने मेरे सम्पादकत्व में अपनी मासिक पत्रिका “अम्बेडकर इन इण्डिया“ का रामस्वरूप वर्मा विषेशांक भी प्रकाषित किया था जिसने पर्याप्त ल¨कप्रियता हासिल की ़रामस्वरूप वर्मा क¢ प्रथम खण्ड में       पुस्तक¢ं संकलित हैं ़उम्मीद है परिवर्तनकामी जनता अ©र जनषक्तिय¨ं क¢ लिए वर्मा


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